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कानपुर में हेपेटाइटिस-सी के 806 मरीजों का मुफ्त इलाज, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बना जीवनदायिनी केंद्र

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कानपुर में हेपेटाइटिस-सी के 800 से अधिक मरीजों को मिला नया जीवन, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में मुफ्त इलाज

राष्ट्रीय हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत महंगी जांच, दवाएं और उपचार निःशुल्क उपलब्ध, समय पर जांच कराने की अपील

कानपुर | लोक भारती डिजिटल

दुनियाभर में तेजी से फैल रही हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी के बीच कानपुर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से राहत भरी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत अस्पताल ने अब तक हेपेटाइटिस-सी से पीड़ित 800 से अधिक मरीजों का सफल उपचार कर उन्हें स्वस्थ जीवन प्रदान किया है। यहां मरीजों को महंगी जांच, दवाएं और इलाज पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

गैस्ट्रो विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने बताया कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल केंद्र सरकार के नेशनल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम के तहत अधिकृत उपचार केंद्र है। अगस्त 2024 से जून 2026 के बीच अस्पताल में हेपेटाइटिस-सी के 806 मरीजों का सफल इलाज कर उन्हें पूरी तरह स्वस्थ किया गया। कानपुर के अलावा उर्सला, फतेहपुर और आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।


उन्होंने बताया कि जिस जांच और इलाज पर निजी अस्पतालों में करीब एक लाख रुपये तक का खर्च आता है, वही सुविधा यहां पूरी तरह मुफ्त दी जा रही है। इसके साथ ही जरूरतमंद मरीजों को महंगे इम्प्लांट भी बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

अस्पताल के सर्जरी विभाग में हर महीने 8 से 10 बड़ी कैंसर सर्जरी भी की जा रही हैं। निजी अस्पतालों में इन ऑपरेशनों पर जहां 3 से 4 लाख रुपये तक खर्च होता है, वहीं सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में यह उपचार निशुल्क उपलब्ध है।

गंभीर बीमारियों में उपयोग होने वाली महंगी दवाएं भी मरीजों को मुफ्त दी जा रही हैं। न्यूरोलॉजी विभाग में इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोग्लोबुलिन जैसी दवा, जिसकी 5 ग्राम की कीमत करीब 12 हजार रुपये है, मरीजों को बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जा रही है। एक मरीज के इलाज पर निजी अस्पतालों में डेढ़ से दो लाख रुपये तक का खर्च आता है, जबकि यहां यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क है।

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने लोगों से समय पर स्क्रीनिंग कराने की अपील करते हुए कहा कि हेपेटाइटिस-बी और सी का पता अक्सर किसी सर्जरी, एंजियोग्राफी या रक्तदान से पहले की जांच के दौरान चलता है। यदि परिवार के किसी एक सदस्य में संक्रमण पाया जाता है तो पूरे परिवार को जांच करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीमारी को छिपाने के बजाय समय रहते जांच और उपचार कराने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

 पूरी खबर देखने के लिए नीचे क्लिक करे

 https://youtu.be/hhXDud99Lyg

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